🌸चैटिंग*🌸
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सोमा जब -तब मोबाइल पर व्यस्त रहती। सुबह- शाम,खाते- पीते यहाँ तक की बाथरूम में भी। मोबाइल हमेशा कान पर ही लगा रहता।माँ से रोज़ की तरह आज फिर बहस शुरू हो गयी।
माँ -' रोज़ की बीमारी यह मोबाइल,स्कूल नहीं जाना ? ,देर नहीं हो रही,आज फिर बस के पीछे दौड़ना है?
सोमा --माँ! क्यों पीछे पड़ी हो? जा रही तैयार होने।
माँ -- ' दिन भर चैटिंग ? बेटा ! पढ़ाई कब होगी? एग्जाम हैं न अगले माह, आखिर बारहवीं का बोर्ड है न ?
सोमा -- हाँ ! सुनीता जी! प्री बोर्ड के लिए ही तो कृष्णा से चैट कर रही। नोट्स शेयर कर रही। अच्छे नंबर न लाऊँ तो कहना ।' -उद्धत सुर में सोमा ने जवाब दिया। अक्सर वह माँ का नाम ले लेती है। पर आज माँ हँसने की जगह मौन रही।
माँ - ' टाइम लग रहा तो उसके घर जाकर लिख लाओ। कहाँ रहती है ? दिखाओ तो,थोड़ा तो मैं ही बता दूँगी,' । और हाथ बढ़ा दिया मोबाइल लेने के लिये।
सोमा सकपका गयी। मोबाइल चादर में सरका कर बोली - 'नहीं न। आप क्या समझोगी ? शार्ट में है सब।'-
और झटके से तैयार होने चली गयी।
सुनीता- 'हाँ, एमएससी यूँ ही कर ली मैंने ? नहीं समझूंगी तुम्हारा कोर्स? समझते क्या हैं आजकल के बच्चे माँ -बाप को' ?
बड़बड़ाते हुऐ वह बिस्तर ठीक करने लगी कि चादर के नीचे से मोबाइल वाइब्रेट करने लगा। मोबाइल उठा कर देखा. श्री कृष्णा के नाम से स्क्रीन झपझपा रही थी। ऑन किया तो अजीब उल्टी- सीधी आवाज़ें सुनाई दीं- ' ' ' ओये,.... जान.. जानू.। .स्कूल तो आओगी न?
चौँक कर झट से काट दी कॉल सुनीता ने। देखा उस नाम और नंबर की सारी चैट डिलीटेड थी। न नोट्स न मैसेज दिखे।
सिर्फ अब एक मैसेज -'-वेटिंग -कम सून' ' छप गया गया।
सुनीता की दिल बैठ गया -क्या करे अब?कुछ कहूँ अभी ? या मोबाइल छुपा दूँ? तो स्कूल ही नहीं जायेगी। जिद्दी है सोमा।
दो मिनट में ही स्थिर हो सुनीता ने तय कर लिया अभी कुछ कहना बेकार है।समझाऊंगी तो पुराने विचार का कह टाल देगी। बहाना बना देगी। इस उम्र में कौन अपनी गलती मानेगा? उसने जल्दी से नंबर डायरी में लिख लिया। मैसेज का स्क्रीनशॉट ले मोबाइल वहीं रख दिया टेबल पर। अब रात को रोमेश से बात करके तय करेगी। कुछ तो करना होगा आगे।
तैयार हो कर आयी सोमा तो माँ को अभी भी कमरे में देख चौँक गयी। उसकी नज़र बदली जगह पर रखे मोबाइल पर और सुनीता की खोजती नज़र सोमा के चेहरे पर टिक गयीं। उनमें सिर्फ सवाल थे जवाब नहीं।
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