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🌸 क्षणिकाएँ 🌸
'1-अंग्रेजी चाहे जितनी पढेँ, ज्ञान गुण भले बढ़ जाये
प्यासा मन तभी तृप्त हो जब निज भाषा बोली जाये,
सरल सहज संवाद से जो जन - जन को जोड़े
चारों दिशाओं में प्रसारित हो हर बोली से गले मिले
यही हमारी प्रिय हिंदी है -प्रिय मातृ भाषा है।
आज का ही केवल खास दिवस नहीं है इसका
प्रतिदिन ही मंगल पर्व- समारोह है ।==================================
2-
अपनी भाषा - हिंदी नदी की धारा सी है
न जाने कितनी बोली,भाषाओं को
अपने अंतर में समाती आयी है
नये शब्द नये रुप- स्वरूप ले
यह आगे बढ़ती ही जाती है
रोक सकी न कोई और भाषा
इसके तेज प्रवाह प्रभाव को
इसीलिए देश की भाषा हिंदी
सब बोली और भाषाओं की सरमौर है ।
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3- 🌸 "हिंदी दिवस "🌸
-- क्षणिका --
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3 * कोरे पन्ने पर जब जब भी कलम चली
प्राण प्रतिष्ठित हिंदी भाषा के अक्षर उभर आते हैं
जब भी कुछ सोचा और कुछ कहना चाहा
मनो भाव मेरे सब शब्दों में ढल जाते हैं
सुःख दुख -पीड़ा -परपीड़ा एक कविता में ढल गए
योग-संयोग - वियोग के पल भी
कुछ कहानियों में रच गए
पहली कुहूक और अंतिम बोल अपनी बोली में
जीवन -मरण का जीवंत कथानक कह गए ।
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4-- फिर आ गया है हिंदी दिवस
पर्व मनेगा बंद कमरों और समारोहों में
टाई सूट पहन कर हैप्पी हिंदी दिवस कहेँगे
कसमे वादे किये जायेंगे बस संकल्प न पूरे होंगे
कागज़ पर लिखे जायेंगे आदेश
सरकने लगेंगी धीरे धीरे फ़ाइलें भी
जो कभी न पहुंचेंगी मंज़िल पर
न जाने ऐसे कितने दिन और साल बीते
किसी को याद न आयी राष्ट्रभाषा की
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अंग्रेजी स्कूल में पढ़ लिख कर
बने डॉक्टर और इंजीनियर
हुईं मशक़्कत अब रोज़ी रोटी की
और हुआ सामना अनपढ़ और गरीब
बेहाल मरीज़ों और मज़दूरों से
अंग्रेजी का दिमाग़ सोचे क्या और कैसे बोले ?
गले में अटक गयी अंग्रेजी कंकड सी
ज़ुबान भी कुछ ऐंठ गयी
रोज़ी रोटी की चिंता में
हिंदी ही तारणहार बनी
पूछे हाल -चाल अपनी बोली में
बिन हिंदी बोले क्या काम चले?
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