Monday, July 5, 2010

suno..

.........उज्जैन है महाकाल की नगरी ।हर घर मानो है एक मंदिर ,शहर मैं जाते ही अनुभव होता है की जैसे किसी पवित्र स्थान प गए हों ।त्रिवेणी .चिंतामन गणपति होते हुए महाकाल का मंदिर .ऊंचा शिखर .स्वर्णजातित शिखर
सफ़ेद ईमारत ,भव्य परिसर,आते- जाते लोग ,पुजारी , और सेवक का ताँता लगा था ।
पिछले कुम्भ मैं जो पुनेर्निरामान हुआ उसके कारन व्यवस्थित दर्शन होने लगे हैं । अब तो काफी अनुशाषित हैं .दर्शक भी और पुजारी वर्ग भी ।।
छोटे से गर्भ गृह मैं प्राचीन शिव लिंग की जिस तेरह का अभिषेक हॉट अ है .उसे देखने दूर दूर से लोग आते हैं ।
सुबह की भस्म- और समय- समय के अभिषेक मैं शामिल होने को क्या छोटे क्या बड़े सभी उत्सुक रहते हैं ।
बॉलीवुड और राज नेता सभी हाजिरी देते हैं यहाँ ।
,
---उज्जैन की जनता तो लगभग रोज ही हाजिरी देती हैं यहाँ ।शिव की नगरी अब सावन मैं तो शिवमाय होगी ही , सो शेष कथा फिर ....................

Friday, June 25, 2010

dooree?

...........dil ki ye mazboori kyun hai ?
din lagte patjhad jaise .
sham lage sindooree kyun hai?.
ankh main itn pani kyn hai?

dil ki ye nadani kyun hai ...
safar nahi tere sang mumkin ..
pe dil ki ye manmani kyun hai .?


masdhai ..........




jungle ....

madhai ..... pachmadhi ke pass national park .{tigers}. garmi main kuch sukhe kuch hare pedon ka jungle .jahan ek niyam hai ki koi bhi vahan polythene ya kuch bhi nahi fenkega . jab jeep main jungle- dershan ko jaa rehe they .ander bahut ander jane pe . sunsaan main jeep roki guide ne uter ke ek chota sa tukda cigrette ka or ek choti thaili uthai or jeb main daal lii .
tazub hua or poocha to bola .janweron ko nuksaan na ho to jarooree hai .
sochne ki baat hai ki vahan kon dekhta ?.fir bhi us guide ne apna kaam kiya .to gaon - jungle - biya baan main hain aise saral seedhe log jo apna kaam kerte hain bina ye dekhe ki koi unko dekhta hai ki nahi ..

jungle main mangal ...